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राजस्थान की भाषा और बोलीयाँ ( Rajasthan kee Boliya )
- राजस्थान की राजभाषा हिंदी है परंतु यह की मातृभाषा राजस्थानी है जिसकी लिपि महा जननी है हिंदी दिवस 14 सितंबर को तथा राजस्थानी भाषा दिवस प्रतिवर्ष 21 फरवरी मनाया जाता है।
- प्राकृत भाषा से डिंगल भाषा प्रकट हुई तथा डिंगल भाषा से एक गुजराती एवं मारवाड़ी भाषाओं का विकास हुआ संस्कृत भाषा से पिंगल भाषा प्रकट हुई तथा पिंगल भाषा से बृज भाषा एवं खड़ी हिंदी का विकास हुआ।
- राजस्थानी भाषा की दो शैलियां है पहला डिंगल और दूसरा पिंगल। डिंगल भाषा मारवाड़ी मिश्रित राजस्थानी है जो कि पश्चिमी राजस्थान में अधिकतर रूप से बोली जाती है तथा पिंगल भाषा यह भाषा ब्रिज मिश्रित राजस्थानी भाषा कहलाती है जो कि पूर्वी राजस्थान में बोली जाती है।
- राजस्थानी भाषा का उद्गम संस्कृत और अपभ्रंश के विकास से हुआ माना जाता है राजस्थानी बोलियों का सर्वप्रथम उल्लेख सन 1907, 1908 में सर जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन ने उल्लेख लिंग्विस्टिक सर्वे ऑफ इंडिया में किया।
- पश्चिमी राजस्थानी :- इसमें मारवाड़ी, मेवाड़ी, ढारकी, बीकानेरी, बागड़ी, शेखावटी, देवड़ावाटी, खैराडी, गोडवाडी आदि बोलियां आती है।
- उत्तरी पूर्वी राजस्थानी :- इसमें अहीरवाटी और मेवाती बोलियां आती है।
- मध्य पूर्वी राजस्थानी :- इसमें ढूंढाड़ी, तोरावाटी खड़ी, जयपुरी आदि आती है।
- दक्षिणी पूर्वी राजस्थानी :- इसमें रांगड़ी मालवी, सेथंवाडी आदि आती है।
- दक्षिणी राजस्थानी :- इसमें नीमाडी, भीली, आदि बोलीयाँ आती है।
1. मारवाड़ी :- यह पश्चिमी राजस्थान की प्रधान बोली है जिसकी उत्पत्ति गुर्जरी अपभ्रंश से हुई है। इस भाषा में जैन साहित्य व मीरा के अधिकांश पद इसी भाषा में लिखे गए हैं मारवाड़ी की उपबोलीयाँ जैसे बागड़ी , शेखावटी , बिकानेरी , थली , खेराडी , नागौरी , देवड़ा वाटी , गोडवाडी है।
2. मेवाड़ी :- यह बोली उदयपुर , भीलवाड़ा , राजसमंद, चित्तौड़गढ़ आदि जिलों में बोली जाती है महाराणा कुंभा की कीर्ति स्तंभ प्रशस्ति में मेवाड़ी भाषा का प्राचीन रूप देखा जा सकता है मेवाड़ी भाषा में नी का प्रयोग ज्यादा होता है।
3. ढूंढाड़ी :- यह जयपुर टोंक अजमेर दौसा जिलों में बोली जाती है इसे जयपुरी एवं झाडशही बोली भी कहते हैं। संत दादू और उनके शिष्य की रचनाएं ढूंढाड़ी भाषा में ही है।ढूंढाड़ी बोली में ” छ ” का अधिक प्रयोग किया जाता है। जयपुर के दक्षिण पूर्व एवं टोंक के पश्चिमी भाग में चौरासी ढूंढाड़ी की उपबोली , सवाई माधोपुर के पश्चिम में और टोक के दक्षिणी भाग में नगर चोल ढ़ढारी की उप बोली बोली जाती है और जयपुर के दक्षिण में काठेढडी ढूंढाड़ी कि उप बोली बोली जाती है।
4. हाडोती :- हाडोती इसका निर्माण मेवाड़ी तथा गुजराती भाषाओं के मिश्रण से हुआ है यह राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी भाग में अधिक बोली जाती है जैसे कोटा बूंदी झालावाड़ बांसवाड़ा प्रतापगढ़ आदि जिलों में। बूंदी के प्रसिद्ध कवि सूर्यमल मिश्रण के वंश भास्कर काव्य में हाड़ौती बोली का प्रयोग मिलता है।
5. मेवाती :- यह बोली अलवर भरतपुर धौलपुर तथा उत्तर प्रदेश के मथुरा हरियाणा के गुड़गांव तक बोली जाती है।
6. मालवी :- यह बोली मालवा प्रांत की होने के कारण मालवीय कहलाती है यह राज्य के झालावाड़, कोटा, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़ के क्षेत्र में बोली जाती है मालवी बोली में मारवाड़ी तथा ढूंढाड़ी बोली की कुछ विशेषताएं पाई जाती है निमाड़ी भाषा मालवी की उपबोली है।
7. अहीर वाटी :- पूर्वोत्तर राजस्थान की दूसरी महत्वपूर्ण बोली है इसका प्रभाव अलवर जिले की बहरोड मे ज्यादा तहसील में है। इस गोली को राठी बोली भी कहा जाता है।
8. गोडवाडी :- यह बोली गोडवाड़ प्रदेश जालौर , पाली, बाड़मेर के आसपास के क्षेत्र में अधिक बोली जाती है। यह मारवाड़ी बोली की उपबोली है। बीसलदेव रासो इस भाषा की प्रमुख रचना है। यह जालौर की आहोर तहसील से प्रारंभ होकर पाली जिले की बाली तहसील के संपूर्ण क्षेत्र में बोली जाती है।
9. खैराडी :- यह बोली मेवाड़ी ढूंढाड़ी एवं हाड़ौती बोली का मिश्रण है यह बोली जहाजपुर भीलवाड़ा में टोंक के कुछ इलाकों में बोली जाती है।
10. देवड़ा वाटी :- यह मारवाड़ी भाषा की एक बोली है यह बोली सिरोही क्षेत्र में बोली जाती है।
11. वागड़ी :- डूंगरपुर बांसवाड़ा क्षेत्र को बांगड़ क्षेत्र भी कहते हैं तथा यहां पर बोले जाने वाली बोली बागड़ी कहलाती है। बागड़ी बोली को ही भीलों की बोली भी कहते है।
12. तोरावाटी :- यह जयपुर जिले के उत्तरी भाग में सीकर झुंझुनू प्रदेश में बोली जाने वाली महत्वपूर्ण भाषा है।
13. पंजाबी :- बोली यह बोली राजस्थान के श्रीगंगानगर वह हनुमानगढ़ जिले में अधिक बोली जाती है।
14. थली/ बीकानेरी बोली :- यह बोली बीकानेर चूरू श्रीगंगानगर प्रदेश में बोली जाती है।
15. ब्रज बोली :- यह बोली राजस्थान के भरतपुर और धौलपुर जिले के क्षेत्रों में बोली जाती है।
16. शेखावाटी बोली :- यह बोली राजस्थान के शेखावाटी प्रदेश चूरू सीकर झुंझुनू जिले में बोली जाती है।